Saturday, July 1, 2017

ऐसा करते नहीं

ख्वाबों में जो भी निश्छल,मुस्कुरा रहा हो,
नींद से,उसको भूल कर भी,जगाते नहीं हैं।

रात-रात जो जागा हो,इंतज़ार में तुम्हारी,
उससे मुख मोड़ के,कभी भी,जाते नहीं हैं। 

जिसकी हँसी में,बसी हों,खुशियाँ तुम्हारी,
उसके माथे पे,शिकन कभी,लाते नहीं  हैं।

सुख दुःख के दिन-रात तो आते-जाते रहेंगे,
हिम्मत नहीं हारते,कभी भी,घबड़ाते नहीं हैं।

जो साया बन के आई है,जन्म भर के लिए,
दोष उसके,कभी भी,गिनते-सुनाते नहीं हैं ।

घर की इज़्ज़त तो,तुम्हारी ही पहचान है,
सड़कों पे उसकी,बात कभी,लाते नहीं हैं ।

गम को भले भुला देना,काली रात जान के,
ख़ुशी के,उजले-लम्हे कभी,भुलाते नहीं हैं।

गलत काम करने से पहले,सोचना कई बार ,
इंसानियत को कभी दागदार बनाते नहीं हैं।

दोस्ती के नाम,जो हाजिर हो,हर वक्त पर,
ऐसे रिश्ते में,शक़ की दीवार,उठाते नहीं हैं।

ज़ख्म दिए हों,जिन रिश्तों ने रह-रह कर,
उन राहों पे मुड़-मुड़ के कभी जाते नहीं हैं।

                                              ( जयश्री वर्मा )



2 comments:

  1. दोस्ती के नाम,जो हाजिर हो,हर वक्त पर,
    ऐसे रिश्ते में,शक़ की दीवार,उठाते नहीं हैं।

    बेहतरीन पंक्तियाँ रची हैं जयश्री जी!

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    1. सादर धन्यवाद आपका संजय भास्कर जी !

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